Essay on Holi in Hindi ( होली पर निबंध )

essay on holi in hindi

संसार में भारत देश सबसे निराला है। प्रकृति  का इसे वरदान प्राप्त है। यहां की धरती खनिज पदार्थों से भरी पड़ी है। प्राचीन काल में यह दुनिया में सोने की चिड़िया कहलाता था। यहां के लोग केवल धन, सुख और आनंद मे डूबे रहते थे। इसलिए यहां पूरे वर्ष हम कई त्योहार मनाते रहते हैं। 

रक्षाबंधन, दशहरा, दीपावली और होली का नाम तो हम मे से प्रत्येक जानता है। हमारी सबसे सुंदर मद भरी और आनंद प्रदान करने वाली ऋतु बसंत मानी जाती है। इसी ऋतु में सबको मस्ती में भर देने वाला पर्व होली का त्यौहार होता है। धरती का आंगन प्राकृतिक सौंदर्य से भरा रहता है। प्रकृति मानो रंग-बिरंगे फूलों की हरियाली साड़ी पहने दुल्हन जैसी लगती है। शीतल-मंद और सुगंधित हवा के झोंके से निकला यह होली का त्यौहार मस्ती और फागुन की बहार लेकर फागुन की समाप्ति पर आता है।

होली का महत्व

हमारे समाज में होली का महत्व केवल वसतु ऋतु के कारण ही नहीं है। इसका धार्मिक, पौराणिक, सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। धर्म प्रधान भारत के वासियों को होली याद दिलाती है कि धरती के कण-कण में ईश्वर समाया हुआ है। उस पर श्रद्धा विश्वास रखकर चलोगे तो सारे वरदान और शक्ति रखने वाली होलिका जैसी राक्षसी शक्ति भी तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती है।

संसार में ईश्वर की शक्ति से बढ़कर कोई नहीं है। प्रहलाद जैसे ईश्वर भक्त और उसके पिता दैत्यराज हिरण्यकश्यपु की घटनाओं से जुड़कर होली का महत्व ओर भी बढ़ जाता है। इस दिन हम होली जलाकर और गुलाल खेल कर आपस में भाईचारे को बढ़ावा, शत्रु भाव को मिटाते तथा समाज की ऊंच-नीच, छोटे-बड़े, अमीर-गरीब की भावना को भूल कर सब एक हो जाते हैं। गले मिलकर पिछले बैर-भाव को जला देते हैं और प्रेम के रंग तथा मस्ती में गुलाल में डूबकर एक प्रेम भाव में नाचते कूदते, गाते-बजाते हैं। 

होली का एक महत्व यह भी है कि होली की आग में हमारे कृषक भाई जो की बाल भुनते हैं अर्थात नए फसल के आगमन पर सारे देश में यज्ञ होता है। जो कि रब्बी की फसल के पकने का संकेत है। होली को 8 दिन तक मनाने का विधान था इसके बाद गेहूं और नये अन्न का कटना प्रारंभ हो जाता है। आजकल ऐसा नहीं दिखाई पड़ता है कि नए फसल सारे देश में कटती हो किंतु पूर्वी क्षेत्र, दक्षिणी क्षेत्र में यह फसल कटने के दिन है। होली के बाद मौसम में परिवर्तन होने लगता है। जाड़ा समाप्त होने लगता है। 

होली की कथा

होली के साथ एक पौराणिक कथा का वर्णन अवश्य होता है। हिरण्यकश्यप जिन्होंने अपने पराक्रम से देवलोक तथा मनुष्यलोक दोनों को जीत लिया था। अपने तपोबल से ब्रह्माजी से यह वरदान भी प्राप्त कर लिया था कि मनुष्य, देव, किसी के भी हाथ से, किसी भी अस्त्र-शस्त्र से और ना दिन में तथा ना रात में उसकी मृत्यु हो पाए। अपने को मृत्यु से ऊपर मारकर वह अपने को भगवान से भी बड़ा मानने लगा था। 

उसका पुत्र प्रहलाद ईश्वर भक्त था। पिता चाहता था कि बेटा उसे ईश्वर मानकर उसकी पूजा करें किंतु प्रहलाद ने यह आज्ञा नहीं मानी। क्रोध में हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारना चाहा पर वह इसमे सफल नहीं हुआ। फिर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका, जिससे आग में ना जलने का वरदान प्राप्त था को तैयार किया कि वह प्रहलाद को गोदी में लेकर भयंकर आग की लपटो में बैठ जाए जिससे उसकी आज्ञा ना मानने वाला प्रहलाद जल जाए। होलिका ने ऐसा ही किया किंतु प्रहलाद का ईश्वर विश्वास इतना प्रबल था कि प्रहलाद तो बच गया किंतु होलिका आग में जल गई।

उपसंहार

हिंदू समाज में समानता स्थापित करने और पुरानी शत्रुता को बुलाने आती है। यह मनोरंजन, हंसी, मस्ती और हल्ले- गुल्ले का अनूठा पर्व होता है। इसका संदेश है कि पहले दिन अर्थात पुराने वर्ष के अंतिम दिन फाल्गुन पूर्णमासी की रात में अपने हृदय में स्थित ईशा के भाव को अग्नि में जला दो और दूसरे दिन फूलों से रंग पकाकर सभी को प्रेम के बसंती रंग में भिगोकर एक रूप, एक रस के भावों में डूब जाओ। 

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